शेषकरण भंवरदान चारणने राजस्थान-गुजरात के संबंधों पर महाशोध निबंध पर पीएचडी की डिग्री हसाल की

झनकली-बाड़मेर, राजस्थान के मूल निवासी, वे वर्तमान में पिछले 4 (चार) वर्षों से राजकीय विनयन कॉलेज, वाव (बनासकांठा) में इतिहास के प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। वर्ष २०१८ में गुजरात विश्वविद्यालय ने अहमदाबाद में पीएचडी की डिग्री के लिए पंजीकरण कराया और ४ साल की लगातार मेहनत और लगन से २४/०६/२०२२ को गुजरात विश्वविद्यालय, अहमदाबाद से शिक्षा की दुनिया में सबसे बड़ी डिग्री हासिल की। ऐतिहासिक दृष्टिकोण से दोनों राज्यों के बीच संबंधों का बहुत अच्छी तरह से वर्णन किया गया है। प्रो. शेषकरण चारणजी “स्वतंत्रता के बाद गुजरात और राजस्थान के संबंधों का तुलनात्मक अध्ययन (सांस्कृतिक इतिहास के विशेष संदर्भ में)” विषय पर  हरपाल राणा के मार्गदर्शन में शोध कार्य पूर्ण किया| उनका दोनों राज्यों के बिच का यह सफ़र भविष्य के नए शोधकर्ताओं के लिए प्रेरणास्रोत होगा।

शेषकरण चारण न केवल राजस्थान से बल्कि वाव, थराद, और सुइगाम के जनसमुदाय के साथ  एक परिवार की भांति मिल गए है| साथ ही  सामाजिक और शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहेते है और उनके यही स्वभाव के परिणामस्वरूप वे बहुत लोकप्रिय हो गए हैं।

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